कभी मैं अपने हाथों की लकीरों से नहीं उलझा
मुझे मालूम है क़िस्मत का लिक्खा भी बदलता है
समन्दर पार करके जब मैं आया देखता क्या हूँ
हमारे दो घरों के बीच सन्नाटे का सेहरा है
मकाँ से क्या मुझे लेना मकाँ तुमको मुबारक हो
मगर ये घास वाला रेशमी कालीन मेरा है
--------------------------------BASHIR BADAR
saloni chugh - 14 years ago
yes i belive in astrology
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मुझे मालूम है क़िस्मत का लिक्खा भी बदलता है
समन्दर पार करके जब मैं आया देखता क्या हूँ
हमारे दो घरों के बीच सन्नाटे का सेहरा है
मकाँ से क्या मुझे लेना मकाँ तुमको मुबारक हो
मगर ये घास वाला रेशमी कालीन मेरा है
--------------------------------BASHIR BADAR
yes i belive in astrology